डेली डोज़ ! सुशील सिंह
आयुक्त साहब, KDMC पर कब पड़ेगी आपकी नजर?
अस्पताल से सड़कों और आवारा कुत्तों तक सवालों में व्यवस्था; एक के बाद एक घटनाओं ने बढ़ाई KDMC प्रशासन की चुनौती
कल्याण। कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका यानी KDMC शहर को बेहतर नागरिक सुविधाएं देने के दावे कर रही है, लेकिन हाल के दिनों में सामने आई कई घटनाओं ने महानगरपालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में अब सवाल यह है कि क्या आयुक्त अभिनव गोयल को व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर और ज्यादा सख्ती से ध्यान देने की जरूरत है?
फ्रैक्चर हुआ, प्लास्टर की जगह लगा दिया कार्डबोर्ड!
14 अगस्त को KDMC के रुक्मिणीबाई अस्पताल से चौंकाने वाला मामला सामने आया। फ्रैक्चर के एक मरीज के पैर पर प्लास्टर के बजाय कार्डबोर्ड लगाने का आरोप लगा। मामले के सामने आने के बाद KDMC प्रशासन ने संबंधित सफाई कर्मचारी को निलंबित किया। जांच में अस्पताल में प्लास्टर की सामग्री उपलब्ध होने की बात भी सामने आई और विभागीय जांच के आदेश दिए गए।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि ऐसी स्थिति पैदा ही कैसे हुई? अस्पताल में मरीजों के इलाज की निगरानी की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
ढाई साल के बच्चे के शरीर में रह गई इंजेक्शन की टूटी सुई
इससे कुछ ही दिन पहले रुक्मिणीबाई अस्पताल से एक और गंभीर मामला सामने आया था। ढाई साल के बच्चे को एंटी-रेबीज इंजेक्शन देने के दौरान कथित तौर पर सुई टूटकर उसके शरीर में रह गई। बाद में निजी अस्पताल में एक्स-रे के बाद इसका पता चला और ऑपरेशन करके सुई निकालनी पड़ी। KDMC स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले में जांच के आदेश दिए।
एक ही महानगरपालिका अस्पताल से लगातार गंभीर शिकायतें सामने आना क्या सिर्फ अलग-अलग कर्मचारियों की गलती है, या निगरानी व्यवस्था की भी समीक्षा जरूरी है?
24 घंटे में 161 डॉग-बाइट केस
10 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक कल्याण में केवल 24 घंटे के भीतर 161 डॉग-बाइट के मामले दर्ज हुए। इनमें कई गंभीर मामले भी थे। इसके बाद आयुक्त अभिनव गोयल और अन्य पदाधिकारियों ने डॉग स्टरलाइजेशन और वैक्सीनेशन सेंटर का निरीक्षण किया तथा KDMC ने डॉग-कैचिंग अभियान तेज किया।
यह कार्रवाई जरूरी थी, लेकिन यहां भी नागरिकों का मूल सवाल यही है—कार्रवाई घटना होने से पहले क्यों नहीं, घटना के बाद ही क्यों तेज होती है?
सड़कों के गड्ढों पर KDMC की सभा में भी उठ चुके हैं सवाल
कल्याण-डोंबिवली की खराब सड़कों और गड्ढों का मुद्दा भी लगातार चर्चा में रहा है। जून में KDMC की आम सभा में सड़क और गड्ढों की स्थिति को लेकर तीखी बहस हुई थी। प्रशासन पर मानसून से पहले पर्याप्त काम नहीं करने के आरोप भी लगाए गए थे।
जब नागरिक महानगरपालिका को नियमित रूप से टैक्स देते हैं, तो अच्छी सड़क, सुरक्षित अस्पताल, साफ-सफाई और सुरक्षित सार्वजनिक स्थान उनकी बुनियादी अपेक्षा है।
आयुक्त गोयल के सामने अब असली परीक्षा
यह भी तथ्य है कि आयुक्त अभिनव गोयल के कार्यकाल में KDMC ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए अंबरनाथ के सरकारी मेडिकल कॉलेज के साथ समझौता किया है। इसके तहत रुक्मिणीबाई सहित KDMC अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर, ICU और अन्य सुविधाएं बढ़ाने की योजना है।
यानी योजनाएं बन रही हैं और घटनाओं के बाद कार्रवाई भी हो रही है। लेकिन अब जरूरत सिर्फ कार्रवाई की नहीं, ऐसी घटनाएं दोबारा न हों इसके लिए मजबूत सिस्टम और लगातार निगरानी की है।
❓ KDMC प्रशासन से पांच सीधे सवाल
1. रुक्मिणीबाई अस्पताल में बार-बार विवादास्पद घटनाएं क्यों सामने आ रही हैं?
2. अस्पतालों में कर्मचारियों और मरीजों की देखरेख की नियमित मॉनिटरिंग कौन करता है?
3. आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए स्थायी और प्रभावी व्यवस्था क्या है?
4. शहर की गड्ढामुक्त सड़कों के लिए समयबद्ध योजना कब जमीन पर दिखाई देगी?
5. शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई के बजाय समस्या पैदा होने से पहले रोकने की व्यवस्था कब मजबूत होगी?
आयुक्त साहब, जनता को कार्रवाई के साथ परिणाम भी चाहिए
KDMC के पास बड़ा प्रशासनिक तंत्र और करोड़ों रुपये का बजट है। ऐसे में कल्याण-डोंबिवली के नागरिकों को यह अपेक्षा करने का पूरा अधिकार है कि उन्हें सुरक्षित सड़कें, बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रभावी नागरिक सेवाएं मिलें।
अब देखना होगा कि आयुक्त अभिनव गोयल इन लगातार सामने आ रही समस्याओं पर केवल संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित रहते हैं या पूरे सिस्टम में ऐसा बदलाव लाते हैं जिसका असर कल्याण-डोंबिवली की सड़कों और नागरिक सुविधाओं पर वास्तव में दिखाई दे।
— विशेष रिपोर्ट | कल्याण-डोंबिवली












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