​निजी विश्वविद्यालयों पर सरकार की टेढ़ी नजर: जांच समिति का कार्यकाल दिसंबर 2026 तक बढ़ा।

मुंबई | विनोद तिवारी !

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के निजी विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक और प्रशासनिक कामकाज की जांच कर रही निगरानी समिति को बड़ी राहत दी है। सरकार ने एक आधिकारिक निर्णय (GR) जारी करते हुए समिति के कार्यकाल को 31 दिसंबर, 2026 तक का विस्तार समय दे दिया है।

​क्यों बढ़ाया गया कार्यकाल?
​मूल रूप से 19 जुलाई, 2024 को गठित इस समिति को निजी विश्वविद्यालयों की समीक्षा कर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपनी थी। हालांकि, कार्यक्षेत्र काफी बड़ा होने और विश्वविद्यालयों से प्राप्त भारी मात्रा में जानकारी, डेटा और दस्तावेजों के गहन विश्लेषण के लिए समिति ने अतिरिक्त समय की मांग की थी, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है।

​समिति में बड़ा प्रशासनिक बदलाव

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कार्यकाल विस्तार के साथ ही समिति की संरचना में भी बदलाव किया गया है। अब डॉ. श्री शैलेंद्र देवळाणकर के स्थान पर डॉ. श्री किरण बोंदर को समिति का नया समन्वयक और सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। वे अब जांच और समन्वय की कमान संभालेंगे।

​सुप्रीम कोर्ट का भी कड़ा रुख

​महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश का सर्वोच्च न्यायालय भी निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली को लेकर सख्त है। सुप्रीम कोर्ट वर्तमान में देश भर के निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, शासन और फंडिंग (वित्तपोषण) के स्रोतों की जांच कर रहा है। अदालत ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से इस संबंध में कड़े अनुपालन विवरण भी मांगे हैं।

​निगरानी के दायरे में कामकाज

​समिति मुख्य रूप से निम्नलिखित पहलुओं की जांच कर रही है:

  • ​निजी विश्वविद्यालयों का शैक्षणिक स्तर और गुणवत्ता।
  • ​प्रशासनिक पारदर्शिता और नियमों का पालन।
  • ​आधारभूत संरचना और भर्ती प्रक्रिया।

​इस विस्तार के बाद अब निजी विश्वविद्यालयों को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने और नियमों के पालन के लिए कड़ी निगरानी का सामना करना पड़ेगा।

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