KDMC का बड़ा एक्शन; प्रसूति विभाग में MBBS डॉक्टर की मौजूदगी अनिवार्य, जांच के अंतिम निष्कर्ष पर टिकी नजर
कल्याण | Daily Dose
कल्याण पूर्व स्थित कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) के शक्तिधाम अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात शिशु की मौत के बाद आखिरकार प्रशासन हरकत में आया है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए KDMC प्रशासन ने घटना के दिन ड्यूटी पर मौजूद RMO डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें काम से हटा दिया है। इतना ही नहीं, अस्पताल के लिए डॉक्टर उपलब्ध कराने वाली संबंधित ठेकेदार कंपनी के चालू महीने के भुगतान में 25 प्रतिशत की कटौती करने की कार्रवाई भी की गई है।
इस पूरे मामले के बाद KDMC ने एक और महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए प्रसूति विभाग में MBBS डॉक्टर की उपलब्धता अनिवार्य कर दी है।
यह कार्रवाई जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही बड़ा सवाल अब यह उठ रहा है कि—
क्या ऐसी व्यवस्था पहले से होती तो यह दुखद घटना टाली जा सकती थी?
क्या था पूरा मामला?
कल्याण पूर्व के शक्तिधाम अस्पताल में एक गर्भवती महिला को प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था। प्रसव के दौरान उसके नवजात शिशु की मौत हो गई।
घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए इलाज और जरूरी चिकित्सा सहायता मिलने में देरी होने का आरोप लगाया था।
मामला सामने आने के बाद KDMC के स्वास्थ्य विभाग ने घटना की जांच शुरू की।
अब जांच प्रक्रिया के बीच प्रशासन की ओर से RMO डॉक्टर और डॉक्टर उपलब्ध कराने वाली ठेकेदार एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई सामने आई है।
RMO को हटाया, मेडिकल कोऑर्डिनेशन पर सवाल
घटना के दिन ड्यूटी पर मौजूद RMO से मरीज की स्थिति पर नजर रखने के साथ ही आवश्यकता पड़ने पर स्त्री रोग विशेषज्ञ को तत्काल जानकारी देना और मेडिकल कोऑर्डिनेशन बनाए रखना अपेक्षित था।
मिली जानकारी के मुताबिक प्रशासन ने इस मामले में मेडिकल समन्वय से जुड़े पहलुओं को गंभीरता से लिया है और संबंधित RMO डॉक्टर को काम से हटा दिया गया है।
हालांकि, यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि नवजात की मौत का वास्तविक चिकित्सा कारण क्या था और किसी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही हुई या नहीं, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
ठेकेदार कंपनी पर भी कार्रवाई, 25% भुगतान कटा
KDMC ने कार्रवाई केवल ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर तक सीमित नहीं रखी है।
शक्तिधाम अस्पताल में डॉक्टर उपलब्ध कराने वाली संबंधित ठेकेदार कंपनी के चालू महीने के बिल से 25 प्रतिशत राशि काटने का फैसला लिया गया है।
इस कार्रवाई के बाद एक महत्वपूर्ण सवाल ठेके पर दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही को लेकर भी खड़ा हो गया है।
डॉक्टरों की नियुक्ति, उनकी योग्यता, ड्यूटी पर उपलब्धता और कामकाज की निगरानी आखिर किसकी जिम्मेदारी है?
अब प्रसूति विभाग में MBBS डॉक्टर होना अनिवार्य
घटना के बाद KDMC प्रशासन ने अपने अस्पतालों में प्रसूति सेवा को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है।
अब प्रसूति विभाग में MBBS डॉक्टर की उपलब्धता अनिवार्य रहेगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रसव के दौरान अचानक कोई गंभीर स्थिति उत्पन्न होने पर तत्काल मेडिकल निर्णय लिया जा सके और विशेषज्ञ डॉक्टर से समय रहते समन्वय स्थापित हो सके।
लेकिन प्रशासन के इस फैसले के बाद एक स्वाभाविक सवाल भी खड़ा होता है—
अगर MBBS डॉक्टर की मौजूदगी इतनी जरूरी थी, तो यह व्यवस्था पहले से क्यों नहीं थी?
शक्तिधाम अस्पताल फिर सवालों के घेरे में
कल्याण पूर्व की बड़ी आबादी को सरकारी स्तर पर प्रसूति सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शक्तिधाम प्रसूति अस्पताल शुरू किया गया था।
लेकिन नवजात की मौत की इस घटना ने एक बार फिर डॉक्टरों की उपलब्धता, आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था, मेडिकल स्टाफ के बीच समन्वय और कंत्राटी स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी जैसे मुद्दों को सामने ला दिया है।
सिर्फ किसी घटना के बाद कार्रवाई कर देना पर्याप्त नहीं है।
सवाल यह है कि अस्पतालों में ऐसी व्यवस्था कब बनेगी, जहां मरीज और उसके परिजनों को यह भरोसा हो कि Emergency की स्थिति में योग्य डॉक्टर, जरूरी मेडिकल स्टाफ और तत्काल निर्णय लेने वाली व्यवस्था मौजूद है।
कार्रवाई बड़ी, लेकिन जांच रिपोर्ट और भी महत्वपूर्ण
RMO को हटाना और ठेकेदार कंपनी के भुगतान में 25 प्रतिशत कटौती प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई है।
लेकिन इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण होगी जांच की अंतिम रिपोर्ट।
उसी से साफ होगा कि—
इलाज के दौरान वास्तव में क्या हुआ?
किस स्तर पर चूक हुई?
क्या तय मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन किया गया था?
और सबसे अहम—
भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए KDMC क्या स्थायी सुधार करने जा रही है?
Daily Dose सवाल
एक नवजात की जान जाने के बाद व्यवस्था बदली—लेकिन सवाल यही है कि KDMC की स्वास्थ्य व्यवस्था घटना के बाद जागेगी या घटना से पहले जिम्मेदारी निभाने वाली मजबूत व्यवस्था तैयार करेगी?
इस मामले में जांच का अंतिम निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है। इसलिए किसी डॉक्टर या कर्मचारी को नवजात की मौत के लिए सीधे जिम्मेदार ठहराने के बजाय निष्पक्ष जांच और तथ्य आधारित जवाबदेही तय होना जरूरी है।
✍️ रिपोर्ट : सुशील सिंह | Daily Dose












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