डेली डोज | कल्याण
गणेशोत्सव से पहले कल्याण में बच्चों ने अपने हाथों से मिट्टी के बप्पा बनाए। करीब 120 विद्यार्थियों ने शाडू मिट्टी से गणेश मूर्तियां बनाकर एक ही संदेश दिया—त्योहार मनाइए, लेकिन पर्यावरण का भी ध्यान रखिए।
KDMC के पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण विभाग, पोदार इंटरनेशनल स्कूल और सामाजिक संस्था लाभ फाउंडेशन की ओर से सोमवार, 18 अगस्त को कल्याण पश्चिम स्थित पोदार इंटरनेशनल स्कूल में शाडू मिट्टी से गणेश मूर्ति बनाने की नि:शुल्क कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला में करीब 120 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। बच्चों ने अपने हाथों से शाडू मिट्टी को आकार देकर अलग-अलग सुंदर गणेश मूर्तियां बनाई। किसी ने छोटे बप्पा बनाए तो किसी ने अपनी कल्पना से गणेशजी को नया रूप दिया।
खबर की खास बातें
• 120 बच्चों ने बनाए अपने बप्पा
• POP के बजाय शाडू मिट्टी अपनाने का संदेश
• आयुक्त अभिनव गोयल ने बच्चों से की बातचीत
• विसर्जन के बाद मिट्टी फिर इस्तेमाल करने की अपील
POP नहीं, शाडू मिट्टी के गणपति अपनाने का संदेश
कार्यशाला का उद्देश्य केवल बच्चों को मूर्ति बनाना सिखाना नहीं था। उन्हें यह भी समझाया गया कि प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्तियां विसर्जन के बाद पानी को नुकसान पहुंचाती हैं, जबकि प्राकृतिक शाडू मिट्टी पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प है।
कार्यक्रम में बच्चों को “मिट्टी के गणेश – पर्यावरण का संदेश” की सोच के साथ पर्यावरणपूरक गणेशोत्सव मनाने के लिए प्रेरित किया गया।
आयुक्त अभिनव गोयल ने बच्चों से की बातचीत
कार्यशाला में KDMC आयुक्त अभिनव गोयल भी पहुंचे। उन्होंने बच्चों से बातचीत करते हुए पर्यावरण संरक्षण, जल प्रदूषण रोकने और पर्यावरणपूरक गणेशोत्सव की जरूरत पर बात की।
उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि गणेशोत्सव की खुशी के साथ प्रकृति की चिंता करना भी हम सभी की जिम्मेदारी है।
इस दौरान उपायुक्त रामदास कोकरे और कार्यकारी अभियंता डॉ. शैलेश कुलकर्णी भी उपस्थित रहे।
फोटो: विद्यार्थियों से संवाद करते KDMC आयुक्त अभिनव गोयल।
मूर्तिकार मीनल लेले ने सिखाए बप्पा बनाने के गुर
कार्यशाला में मूर्तिकार और प्रशिक्षक मीनल लेले ने बच्चों को शाडू मिट्टी से गणेश मूर्ति बनाने की पूरी प्रक्रिया आसान तरीके से समझाई।
मूर्ति को आकार कैसे दें, मिट्टी को कैसे संभालें, मूर्ति सुखाते समय किन बातों का ध्यान रखें और विसर्जन के बाद मिट्टी का दोबारा उपयोग कैसे किया जा सकता है—इन सभी बातों की जानकारी बच्चों को दी गई।
फोटो: शाडू मिट्टी से गणेश मूर्ति बनाते विद्यार्थी
बच्चों का उत्साह रहा देखने लायक
हाथों में मिट्टी और सामने अपने बनाए बप्पा—कार्यशाला के दौरान बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था। कई विद्यार्थियों के लिए खुद अपने हाथों से गणेश मूर्ति बनाने का यह पहला अनुभव था।
KDMC का कहना है कि ऐसी गतिविधियों के जरिए छोटी उम्र से ही बच्चों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना पैदा की जा सकती है।
कार्यक्रम के अंत में आयोजन में सहयोग करने वालों का सम्मान भी किया गया।
एक छोटी पहल, बड़ा संदेश
गणेशोत्सव में श्रद्धा के साथ पर्यावरण की चिंता भी हो, इसी सोच के साथ आयोजित इस कार्यशाला ने बच्चों के जरिए शहर को एक सीधा संदेश दिया—
“बप्पा भी अपने, पर्यावरण भी अपना… इस बार गणेशोत्सव हो पर्यावरणपूरक।”











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