डेली डोज संवाददाता मुंबई.
डिजिटल भुगतान देश में तेज़ी से बढ़ा है और यूपीआई, डेबिट-क्रेडिट कार्ड व इंटरनेट बैंकिंग आम लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। हालांकि, सुविधा के साथ-साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले भी बढ़े हैं। इसी चुनौती को देखते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक ने स्मॉल वैल्यू डिजिटल फ्रॉड मामलों में ग्राहकों को अधिकतम 25,000 रुपये तक मुआवजा देने का प्रस्ताव रखा है। अहम बात यह है कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ओटीपी साझा करने वाले ग्राहक भी जीवन में एक बार इस राहत के पात्र होंगे।
आरबीआई ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखा, जिससे आम लोगों की ईएमआई पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इसी बैठक में डिजिटल फ्रॉड से जुड़े उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने का संकेत देते हुए यह प्रस्ताव सामने आया। योजना के अनुसार 50,000 रुपये या उससे कम की धोखाधड़ी के मामलों में ग्राहक को कुल नुकसान का 85 प्रतिशत या अधिकतम 25,000 रुपये—जो भी कम हो—मुआवजे के रूप में मिलेगा। शेष 15 प्रतिशत नुकसान ग्राहक को उठाना होगा, 15 प्रतिशत संबंधित बैंक वहन करेगा, जबकि 70 प्रतिशत राशि रिज़र्व बैंक की ओर से दी जाएगी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया है कि जल्द ही इस संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे।
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल डिजिटल सिस्टम में भरोसा बढ़ाने की दिशा में अहम कदम है। ग्रेडेड फाइनेंशियल सर्विसेज के फाउंडर अजीत सिंह ठाकुर के अनुसार, यह प्रस्ताव उपभोक्ताओं को यह भरोसा देता है कि तकनीकी खामियों या सीमित लापरवाही के कारण हुए नुकसान का बोझ उन्हें अकेले नहीं उठाना पड़ेगा।
कई परिवारों के लिए 5,000 से 10,000 रुपये की ठगी भी गंभीर आर्थिक संकट बन जाती है, ऐसे में एक तय मुआवजा ढांचा अनिश्चितता को कम करता है और डिजिटल भुगतान अपनाने का भरोसा बढ़ाता है, खासकर अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों में।
हालांकि, साइबर एक्सपर्ट प्रशांत माली का कहना है कि राहत की यह व्यवस्था तभी प्रभावी होगी जब इसका क्रियान्वयन सख्त और पारदर्शी हो। बैंक, फिनटेक कंपनियों और पेमेंट गेटवे की स्पष्ट जवाबदेही तय किए बिना डिजिटल फ्रॉड पर पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं है। केवल मुआवजा व्यवस्था से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि रोकथाम के मजबूत उपाय भी उतने ही जरूरी हैं।
वित्त विशेषज्ञ पंकज जायसवाल के मुताबिक स्मॉल वैल्यू डिजिटल फ्रॉड पर 25,000 रुपये तक क्षतिपूर्ति का प्रस्ताव स्वागतयोग्य है। बुजुर्गों जैसे संवेदनशील वर्ग के लिए अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन और जागरूकता की जरूरत है। भले ही सीनियर सिटीजन से जुड़े कई मामलों में यह राशि कम लग सकती है, लेकिन यह साफ संकेत देता है कि नियामक डिजिटल धोखाधड़ी की समस्या को गंभीरता से ले रहा है।
आरबीआई के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में कार्ड और इंटरनेट आधारित लेन-देन से जुड़े धोखाधड़ी के 13,469 मामले दर्ज किए गए, जिनमें करीब 520 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके मुकाबले 2023-24 में ऐसे 29,080 मामले सामने आए थे, जिनसे 1,457 करोड़ रुपये की चपत लगी थी। आंकड़ों में गिरावट के बावजूद नुकसान की गंभीरता यह बताती है कि डिजिटल फ्रॉड अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।











Leave a Reply