डेली डोज़ संवाददाता , विनोद तिवारी!
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSE) को बड़ी राहत देते हुए ऋण नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। सोमवार को जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब बैंकों के लिए 20 लाख रुपये तक के लोन पर किसी भी प्रकार की कोलैटरल सिक्योरिटी (जमानत या गारंटी) मांगना प्रतिबंधित कर दिया गया है।
क्या हैं नए नियम?
RBI द्वारा जारी अधिसूचना (RBI/2025-26/206) के अनुसार, मास्टर डायरेक्शन में निम्नलिखित संशोधन किए गए हैं:
अनिवार्य छूट: बैंकों को सूक्ष्म एवं लघु क्षेत्र की इकाइयों को दिए जाने वाले 20 लाख रुपये तक के ऋण के लिए कोलैटरल सिक्योरिटी नहीं लेनी होगी।
PMEGP को लाभ: प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत KVIC द्वारा प्रशासित सभी इकाइयों को भी 20 लाख रुपये तक का कोलैटरल-फ्री लोन मिलेगा।
स्वैच्छिक सीमा में वृद्धि: यदि किसी इकाई का ट्रैक रिकॉर्ड और वित्तीय स्थिति अच्छी है, तो बैंक अपनी आंतरिक नीति के आधार पर इस सीमा को 25 लाख रुपये तक बढ़ा सकते हैं।
सोना-चांदी अपवाद: यदि उधारकर्ता अपनी मर्जी से सोना या चांदी गिरवी रखकर ऋण लेना चाहता है, तो इसे नियमों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।
1 अप्रैल से लागू होंगी दरें
RBI ने स्पष्ट किया है कि ये नए नियम 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होंगे। यह उन सभी ऋणों पर लागू होगा जो इस तारीख को या उसके बाद स्वीकृत (Sanction) या रिन्यू किए जाएंगे।
Public Interest (जनहित) में फैसला
रिजर्व बैंक ने बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 21 और 35A के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह कदम उठाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से छोटे उद्यमियों को पूंजी जुटाने में आसानी होगी और स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा।










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