नई दिल्ली | 31 जनवरी, 2026
केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैर पसार चुके साइबर अपराधियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। ‘ऑपरेशन साइस्ट्राइक’ (Operation Cybers-trike) के तहत सीबीआई ने वैश्विक एजेंसियों के साथ मिलकर भारत के 10 राज्यों में एक साथ छापेमारी कर बड़े वित्तीय अपराध सिंडिकेट को ध्वस्त कर दिया है।
ग्लोबल सहयोग से मिली बड़ी सफलता :
यह कार्रवाई महज भारत तक सीमित नहीं थी। सीबीआई ने अमेरिकी जांच एजेंसी FBI, ब्रिटेन, कुवैत, आयरलैंड और सिंगापुर की सुरक्षा एजेंसियों के साथ रियल-टाइम समन्वय स्थापित किया। इंटरपोल के सहयोग से चलाए गए इस मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत की धरती से संचालित हो रहे विदेशी साइबर ठगों के नेटवर्क को जड़ से उखाड़ना है।
ऑपरेशन की मुख्य उपलब्धियां:
देशव्यापी छापेमारी: सीबीआई की टीमों ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, कर्नाटक, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल सहित 35 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी।
कुवैती वीजा स्कैम का पर्दाफाश: जांच में एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ जो eservicemoi-Kw.com नाम की फर्जी वेबसाइट के जरिए निर्दोष भारतीयों को कुवैती ई-वीजा और नौकरी का झांसा दे रहा था। इस मामले में दिल्ली, गाजियाबाद और कर्नाटक से 60 लाख रुपये नकद और भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं।
विदेशी नागरिक थे निशाने पर: यह गिरोह फर्जी पहचान का उपयोग कर अमेरिका और यूरोपीय देशों के नागरिकों को तकनीकी सहायता या अन्य सेवाओं के नाम पर ठग रहा था। दिल्ली से एक मुख्य संचालक को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है।
डिजिटल साक्ष्यों का भंडार: छापेमारी के दौरान भारी संख्या में लैपटॉप, मोबाइल फोन और हार्ड डिस्क जब्त की गई हैं। पुलिस ने अपराध में इस्तेमाल होने वाले कई ‘म्यूल बैंक खातों’ (Mule Accounts) को भी फ्रीज कर दिया है।
संगठित अपराध पर प्रहार : सीबीआई के प्रवक्ता के अनुसार, ये अपराधी न केवल भारत की छवि खराब कर रहे थे, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुँचा रहे थे। ‘ऑपरेशन साइस्ट्राइक’ यह स्पष्ट संदेश है कि डिजिटल दुनिया में छिपे अपराधियों के लिए अब कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है।















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