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गेमिंग जोन में नाबालिग से दुष्कर्म का मामला: कोर्ट ने मालिक को दी जमानत, कहा- ‘जांच पूरी, जेल में रखने का उचित नहीं’।

​कल्याण: विनोद तिवारी!

कल्याण के बहुचर्चित ‘जॉयस्टिक जंगल’ गेमिंग जोन में एक नाबालिग लड़की के साथ हुए यौन उत्पीड़न के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कल्याण फास्ट ट्रैक कोर्ट की पीठासीन अधिकारी वी. ए. पात्रावाले ने गेमिंग जोन के मालिक पृथ्वीराज राजा चव्हाण को सशर्त जमानत मंजूर कर ली है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि अब मामले में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल हो चुकी है और जांच पूरी हो गई है, इसलिए आरोपी को अनिश्चित काल तक जेल में रखना उचित नहीं है।

​क्या है पूरा मामला?
​मामले के अनुसार, 16 वर्षीय पीड़िता की दोस्ती इंस्टाग्राम के जरिए सह-आरोपी ‘क्रिश’ से हुई थी। आरोप है कि फरवरी 2025 से शुरू हुए इस घटनाक्रम में आरोपी क्रिश ने पीड़िता को कोल्सवाड़ी स्थित ‘जॉयस्टिक जंगल’ गेमिंग जोन में ले जाकर उसके साथ यौन उत्पीड़न किया। पुलिस ने गेमिंग जोन के मालिक पृथ्वीराज चव्हाण को भी इस अपराध में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था, क्योंकि उसने अपने परिसर में बिना सीसीटीवी वाले ‘कपल रूम’ उपलब्ध कराए थे, जहाँ यह वारदात हुई।

​अदालत में हुई बहस: ​बचाव पक्ष: आवेदक के वकील ने तर्क दिया कि पृथ्वीराज केवल गेमिंग स्टूडियो का मालिक है। उसका पीड़िता या मुख्य आरोपी के कृत्यों से सीधा संबंध नहीं है। जांच पूरी हो चुकी है, कुछ भी बरामद करना बाकी नहीं है और उसका कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है।

​सरकारी पक्ष (APP): सरकारी वकील ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि मालिक ने जानबूझकर ऐसे कमरे बनाए थे जो सीसीटीवी की निगरानी में नहीं थे। यह एक गंभीर अपराध है और आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकता है।

​पीड़िता का पक्ष: पीड़िता के परिवार ने कोर्ट को बताया कि वह अभी भी सदमे (ट्रॉमा) में है और उसका इलाज चल रहा है। आरोपी के बाहर आने से केस पर बुरा असर पड़ सकता है।

​अदालत का फैसला और शर्तें: अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पिछली बार जमानत इस आधार पर खारिज की गई थी कि जांच चल रही थी। अब पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है, जो परिस्थितियों में एक बड़ा बदलाव है। कोर्ट ने ₹50,000 के निजी मुचलके पर जमानत देते हुए निम्नलिखित शर्तें रखी हैं:

​साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं: आरोपी सबूतों या गवाहों पर किसी भी तरह का दबाव नहीं डालेगा।

​नियमित उपस्थिति: आरोपी को मुकदमे की हर सुनवाई पर अदालत में उपस्थित रहना होगा।

​संपर्क विवरण: आरोपी को अपना और अपने एक रिश्तेदार का मोबाइल नंबर और पता पुलिस को देना होगा।

​शर्तों का उल्लंघन: यदि किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है, तो जमानत तत्काल रद्द कर दी जाएगी।

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