22 साल पुराने डकैती मामले में दो आरोपी बरी, सबूतों के अभाव में कोर्ट का फैसला।

डेली डोज़ संवाददाता / विनोद तिवारी!

​कल्याण: जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने दो दशक से अधिक पुराने डकैती और मारपीट के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ कोई भी ठोस सबूत या गवाह पेश करने में पूरी तरह विफल रहा।

​क्या था मामला?
​यह घटना 24 जुलाई 2002 की है। शिकायतकर्ता महिला और उनके पति धारवाड़ से मुंबई जाने के लिए 1018 चालुक्य एक्सप्रेस में सवार हुए थे। सुबह करीब 7:50 बजे जब ट्रेन कल्याण स्टेशन पहुंची और महिला के पति चाय लेने नीचे उतरे, तभी तीन लुटेरे बोगी (S-6) में घुस आए। लुटेरों ने चाकू की नोक पर महिला को डराकर उनका मंगलसूत्र, चूड़ियां और घड़ी लूट ली थी।

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​22 साल बाद आया फैसला
​घटना के बाद कल्याण रेलवे पुलिस ने आईपीसी की धारा 394, 397 और 34 के तहत मामला दर्ज किया था, लेकिन आरोपी शेख बाबू उर्फ छोटा बाबू शेख प्यारे और शेख अयूब शेख यूसुफ फरार हो गए थे। बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा पुराने मामलों को जल्द निपटाने के निर्देश के बाद, इन फरार आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया तेज की गई।

​बरी होने का मुख्य कारण
​अदालत ने गौर किया कि घटना को बीते 24 साल हो चुके हैं (दर्ज होने के 22 साल बाद सुनवाई), जिस वजह से जांच एजेंसी किसी भी गवाह का पता नहीं लगा सकी।

​गवाहों की अनुपस्थिति: मामले में एक भी चश्मदीद या पीड़ित की गवाही नहीं हो पाई।

​पुलिस की विफलता: केवल एक पुलिस कांस्टेबल, नानासाहेब पाटिल ने गवाही दी, जिन्होंने अदालत को बताया कि पुराने गवाहों का अब कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है।

​अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई भी साक्ष्य मौजूद नहीं है जो आरोपियों की इस अपराध में संलिप्तता को साबित कर सके। इसी के आधार पर शेख बाबू और शेख अयूब को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया।

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